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Alcohol addiction treatment in Indore, High-functioning alcoholic symptoms, शराब की लत का इलाज, Executive rehab in Indore

काम का तनाव और शराब की लत: ‘हाई-फंक्शनिंग एल्कोहोलिज्म’ की छिपी हुई दुनिया जब भी हम ‘शराबी’ या ‘शराब की लत’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में अचानक एक ऐसी तस्वीर उभरती है— एक ऐसा इंसान जिसकी नौकरी छूट गई है, जो सड़क पर लड़खड़ा रहा है, जिसके घर में रोज बर्तन टूटते हैं और जिसे समाज ने नकार दिया है। हम अक्सर सोचते हैं कि शराब की लत सिर्फ उन्हीं लोगों को लगती है जो जिंदगी में हार मान चुके होते हैं। लेकिन, जरा रुकिए। क्या आपने कभी उस इंसान के बारे में सोचा है जो सुबह 9 बजे एकदम कड़क इस्तरी की हुई शर्ट पहनकर ऑफिस जाता है? जो टीम मीटिंग्स में बेहतरीन प्रेजेंटेशन देता है, जिसका बैंक बैलेंस शानदार है, जो वीकेंड्स पर अपनी फैमिली को महंगे रेस्टोरेंट में डिनर पर ले जाता है… लेकिन रात को बिना आधी बोतल शराब पिए उसे नींद नहीं आती? सच कहूँ तो, नशे की एक बहुत बड़ी और खामोश दुनिया आलीशान फ्लैट्स, एसी केबिन और चमचमाती कारों के अंदर सांस ले रही है। इंदौर के सुपर कॉरिडोर, निपानिया, पलासिया और बायपास जैसे पॉश इलाकों में रहने वाले कई सफल आईटी प्रोफेशनल्स (IT Professionals), बिजनेसमैन और उच्च अधिकारी एक ऐसी लत का शिकार हैं, जो बाहर से बिल्कुल नहीं दिखती। मेडिकल और साइकोलॉजी की भाषा में इसे ‘हाई-फंक्शनिंग एल्कोहोलिज्म’ कहा जाता है। अगर आप या आपके जीवनसाथी को लगता है कि ऑफिस का स्ट्रेस मिटाने के लिए रोज रात को वो एक या दो ‘पेग’ जरूरी हो गए हैं, तो इस ब्लॉग को अंत तक जरूर पढ़ें। आज हम बात करेंगे कि यह स्थिति क्या है, इंटरनेट पर लोग क्यों High-functioning alcoholic symptoms सर्च कर रहे हैं, और कैसे अपनी इज्जत और करियर को बचाते हुए आप इससे बाहर आ सकते हैं। हाई-फंक्शनिंग एल्कोहोलिज्म आखिर है क्या? सीधे शब्दों में कहें तो, एक हाई-फंक्शनिंग एल्कोहोलिक वह इंसान है जो शराब की गहरी लत का शिकार है, लेकिन वह दुनिया की नजरों में एक बेहद सफल और जिम्मेदार व्यक्ति है। वह अपने काम, परिवार और समाज की सभी जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से निभा रहा होता है। यही इस बीमारी का सबसे खतरनाक पहलू है। चूंकि व्यक्ति पैसे कमा रहा है और घर सही से चल रहा है, इसलिए उसे या उसके परिवार को कभी लगता ही नहीं कि उन्हें शराब की लत का इलाज कराने की कोई जरूरत है। वह अक्सर अपने बचाव में कहता है— “अरे, मैं कोई शराबी थोड़ी हूँ! मैं तो बस दिनभर की थकान मिटाने के लिए थोड़ी सी पीता हूँ। मैं रोज ऑफिस जाता हूँ, तुम्हारी सारी जरूरतें पूरी करता हूँ, फिर प्रॉब्लम क्या है?” लेकिन प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यह है कि अंदर ही अंदर उसका शरीर और दिमाग शराब का पूरी तरह से गुलाम हो चुका है। बाहर से दिखने वाली यह ‘परफेक्ट लाइफ’ दरअसल एक ऐसा गुब्बारा है जो किसी भी दिन फट सकता है। कैसे शुरू होता है यह सफर: वीकेंड पार्टी से लेकर रोज की जरूरत तक इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में, जहाँ कॉर्पोरेट कल्चर और बिजनेस का दबाव हर दिन बढ़ रहा है, शराब पीना अब स्टेटस सिंबल और ‘स्ट्रेस बस्टर’ बन गया है। इसकी शुरुआत अक्सर बहुत ही मासूम तरीके से होती है। शनिवार की रात दोस्तों के साथ पार्टी, किसी प्रोजेक्ट के सक्सेस होने की खुशी, या बॉस के साथ कोई कैजुअल मीटिंग— शराब बस मजे के लिए पी जाती है। लेकिन जैसे-जैसे ईएमआई (EMI) का बोझ, टारगेट पूरे करने का प्रेशर, और क्लाइंट्स की डेडलाइंस का तनाव बढ़ता है, वैसे-वैसे दिमाग को रिलैक्स करने के लिए शराब एक ‘शॉर्टकट’ बन जाती है। इंसान को लगने लगता है कि ऑफिस की राजनीति और जिंदगी की भागदौड़ से बचने का यही एक तरीका है। जो शराब हफ्ते में एक दिन पी जाती थी, वह अब बुधवार को भी खुलने लगती है, और देखते ही देखते वह हर रात की जरूरत बन जाती है। आपको पता भी नहीं चलता कि कब आपने अपनी भावनाओं (Emotions) को कंट्रोल करने का रिमोट कंट्रोल उस शराब की बोतल के हाथ में दे दिया। कैसे पहचानें? ये हैं High-functioning alcoholic symptoms यदि एक पत्नी, माता-पिता या दोस्त के रूप में आपको अपने किसी करीबी पर शक है, या खुद आपको लग रहा है कि आपकी ड्रिंकिंग हैबिट अब हद पार कर रही है, तो इन 5 बहुत ही बारीक लेकिन गंभीर लक्षणों (Symptoms) पर ध्यान दें: 1. शराब एक ‘रिवॉर्ड’ (इनाम) बन जाना क्या आप काम खत्म होते ही सोचते हैं, “आज मैंने बहुत काम किया है, मैं एक ड्रिंक तो डिजर्व करता हूँ”? जब शराब किसी खुशी को मनाने या किसी गम को भुलाने का एकमात्र तरीका बन जाए, तो समझ लीजिए कि लत दिमाग में जड़ें जमा चुकी है। 2. अपनी ही तय की गई लिमिट को पार कर जाना आप ऑफिस से निकलते वक्त खुद से वादा करते हैं, “आज सिर्फ दो पेग पीऊंगा और खाना खाकर सो जाऊंगा।” लेकिन जब आप पीना शुरू करते हैं, तो वह दो पेग कब पूरी बोतल में बदल जाते हैं, आपको खुद पता नहीं चलता। आपके पास अपनी ड्रिंकिंग पर कोई कंट्रोल (Loss of control) नहीं बचता। 3. पीने के लिए बहाने खोजना और छिपकर पीना हाई-फंक्शनिंग लोग अपनी इमेज को लेकर बहुत सतर्क होते हैं। इसलिए वे अक्सर छिपकर पीते हैं। अपनी कार की डिक्की में बोतल रखना, ऑफिस के दराज में शराब छिपाना, या बाथरूम में जाकर चोरी-छिपे दो घूंट पी लेना—ये सब इस बात के पक्के सबूत हैं कि आपको बेहतरीन Alcohol addiction treatment in Indore की सख्त जरूरत है। 4. ब्लैकआउट्स (Memory Blackouts) का होना सुबह उठकर यह याद न रहना कि रात को खाना खाने के बाद क्या हुआ था? पत्नी से क्या बहस हुई थी? या आपने अपने किसी दोस्त को नशे में क्या मैसेज कर दिया था? शराब जब दिमाग की मेमोरी बनाने की क्षमता को सुन्न कर देती है, तो उसे ब्लैकआउट कहते हैं। यह ब्रेन डैमेज का बहुत बड़ा अलार्म है। 5. टोकने पर भयानक गुस्सा आना (Getting Defensive) अगर परिवार का कोई सदस्य हिम्मत करके कह दे कि “आजकल आप बहुत ज्यादा पीने लगे हैं”, तो सामने वाला तुरंत आग-बबूला हो

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How to choose best nasha mukti kendra in indore

इंदौर में एक सही ‘नशा मुक्ति केंद्र’ (Nasha Mukti Kendra) कैसे चुनें? 5 जरूरी बातें जब परिवार का कोई सदस्य नशे की गहरी लत (शराब, स्मैक, गांजा या ड्रग्स) का शिकार हो जाता है, तो पूरा घर मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है। कई महीनों या सालों की जद्दोजहद के बाद, जब परिवार अंततः मरीज को किसी ‘नशा मुक्ति केंद्र’ में भर्ती करने (Admission) का कठिन फैसला लेता है, तो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि— “इंदौर में सबसे अच्छा नशा मुक्ति केंद्र (Best Nasha Mukti Kendra in Indore) कौन सा है?” यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। गलत रिहैब सेंटर का चुनाव न केवल आपके पैसे बर्बाद कर सकता है, बल्कि आपके प्रियजन की शारीरिक और मानसिक स्थिति को और भी ज्यादा बिगाड़ सकता है। इंटरनेट पर सर्च करने पर आपको ‘नशा मुक्ति केंद्र इंदौर’ के कई विकल्प मिलेंगे, लेकिन एक सही और सुरक्षित रिहैब सेंटर चुनने से पहले आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं वे 5 सबसे जरूरी बातें, जिन्हें एडमिशन फॉर्म भरने से पहले आपको जरूर जाँचना चाहिए। 1. मेडिकल डिटॉक्स (Medical Detox) सुविधा का होना क्यों जरूरी है? कई परिवार सोचते हैं कि मरीज को सिर्फ कमरे में बंद रखने से नशा छूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय से नशा कर रहा होता है और अचानक उसे छोड़ता है, तो शरीर भयंकर प्रतिक्रिया देता है जिसे ‘विड्रॉल सिंड्रोम’ (Withdrawal Symptoms) कहते हैं। इसमें मरीज को दौरे (Seizures) पड़ सकते हैं, उल्टियां हो सकती हैं या हार्ट रेट बिगड़ सकता है। एक बेहतरीन नशा मुक्ति केंद्र में 24×7 मेडिकल डिटॉक्सिफिकेशन की सुविधा होती है। इसका मतलब है कि मरीज के शरीर से नशे का जहर निकालने की प्रक्रिया प्रमाणित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में होती है। दवाओं की मदद से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज को विड्रॉल का दर्द कम से कम हो और उसकी जान को कोई खतरा न रहे। बिना मेडिकल स्टाफ वाले केंद्रों से हमेशा बचें। 2. डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों (Psychiatrists) की टीम की भूमिका नशा सिर्फ एक ‘बुरी आदत’ नहीं है, यह एक दिमागी बीमारी है। नशे की लत के पीछे अक्सर गहरा तनाव, डिप्रेशन, या अकेलापन छिपा होता है। यदि सिर्फ शरीर से नशा निकाल दिया जाए और दिमाग का इलाज न हो, तो मरीज डिस्चार्ज होते ही दोबारा नशा कर लेगा। एक सही रिहैब सेंटर (How to choose a rehab center) वह है जहाँ एक विशेषज्ञ टीम काम करती हो। इस टीम में मनोचिकित्सक (Psychiatrist), क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट (Clinical Psychologist) और काउंसलर शामिल होने चाहिए। ये विशेषज्ञ ‘कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी’ (CBT) के जरिए मरीज के दिमाग से नशे की लालसा (Craving) को खत्म करते हैं और उसे बिना नशे के तनाव झेलना सिखाते हैं। 3. मारपीट या जबरदस्ती वाले केंद्रों से बचें (वैज्ञानिक इलाज का महत्व) हमारे समाज में नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर एक बहुत बड़ा डर यह है कि “वहां मरीजों को पीटा जाता है या जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है।” दुर्भाग्य से, कुछ गैर-मान्यता प्राप्त जगहों पर ऐसा होता है। लेकिन नशा एक बीमारी है, और किसी भी बीमार को पीटकर ठीक नहीं किया जा सकता। एडमिशन से पहले केंद्र का दौरा (Visit) जरूर करें। वहां के स्टाफ का व्यवहार देखें। एक वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) रिहैब सेंटर कभी भी मारपीट या टॉर्चर का सहारा नहीं लेता। वहां मरीज का इलाज प्रेम, करुणा (Empathy) और चिकित्सा विज्ञान के माध्यम से किया जाता है। योग, ध्यान (Meditation) और काउंसलिंग को उपचार का मुख्य हिस्सा बनाया जाता है। 4. 100% गोपनीयता (Confidentiality) और पारिवारिक माहौल जब आप अपने परिवार के किसी सदस्य का इलाज कराते हैं, तो सबसे बड़ा डर समाज की बदनामी का होता है। आप नहीं चाहते कि आपके रिश्तेदारों, पड़ोसियों या मरीज के ऑफिस वालों को इस बात की भनक लगे। इंदौर में एक प्रतिष्ठित नशा मुक्ति केंद्र वह है जो आपकी 100% निजता (Privacy) की गारंटी देता है। इसके अलावा, केंद्र का माहौल जेल जैसा नहीं, बल्कि एक ‘पारिवारिक और सुरक्षित घर’ (Home away from home) जैसा होना चाहिए। साफ-सुथरे एसी/नॉन-एसी कमरे, पौष्टिक और सात्विक आहार, और एक शांतिपूर्ण हरा-भरा परिसर (Campus) मरीज की रिकवरी को बहुत तेजी से बढ़ाता है। 5. आफ्टरकेयर सपोर्ट (Aftercare Support) और पारदर्शिता नशा मुक्ति केवल उन 3 या 6 महीनों की प्रक्रिया नहीं है जो मरीज रिहैब सेंटर में बिताता है। असली चुनौती डिस्चार्ज होने के बाद शुरू होती है, जब मरीज वापस अपनी पुरानी दुनिया और ट्रिगर्स (Triggers) के बीच जाता है। एक उत्कृष्ट नशा मुक्ति केंद्र हमेशा ‘आफ्टरकेयर प्रोग्राम’ प्रदान करता है। इसका मतलब है कि मरीज के घर जाने के बाद भी डॉक्टर और काउंसलर नियमित फॉलो-अप (Follow-up) के जरिए उसके संपर्क में रहते हैं, ताकि वह दोबारा नशे की ओर न जाए (Relapse prevention)। इसके अलावा, एक अच्छे केंद्र में इलाज की प्रक्रिया को लेकर पूरी पारदर्शिता (Transparency) होती है, जहाँ परिवार को मरीज की रिकवरी का नियमित अपडेट दिया जाता है। तपस्या रिहैब इंदौर: आपकी सबसे सुरक्षित और बेहतरीन पसंद (Call To Action) यदि आप इंदौर में सर्वश्रेष्ठ नशा मुक्ति केंद्र (Best Nasha Mukti Kendra in Indore) की तलाश में हैं जो ऊपर बताई गई सभी 5 कसौटियों पर 100% खरा उतरता हो, तो तपस्या डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (Tapasya Rehab) आपका अंतिम गंतव्य है। हम नशे को एक अपराध नहीं, बल्कि एक बीमारी मानते हैं। हमारे पास इंदौर के सर्वश्रेष्ठ मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और 24×7 मेडिकल स्टाफ की एक मजबूत टीम है। हम पूरी तरह से वैज्ञानिक, सुरक्षित और प्रेमपूर्ण माहौल में आपके प्रियजन का इलाज करते हैं, जहाँ 100% गोपनीयता (Confidentiality) का वादा किया जाता है। चाहे आप विजय नगर, पलासिया, भंवरकुआं या इंदौर के किसी भी क्षेत्र से हों, आपके अपनों का भविष्य तपस्या रिहैब के सुरक्षित हाथों में है। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) | तपस्या नशा मुक्ति केंद्र इंदौर तपस्या नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र · 24×7 आपातकालीन सहायता और 100% गोपनीय परामर्श अपने प्रियजन की जान बचाने में अब और देरी न करें। आज ही हमारे केंद्र पर आएं या हमसे बात करें। 24×7 गोपनीय हेल्पलाइन: 9713550995 Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) 1. इंदौर में सबसे अच्छा नशा

Blog, Drug Addiction

10 Hidden Signs of Addiction Symptoms

10 छिपे हुए संकेत जो बताते हैं कि आपका अपना नशे की गिरफ्त में है (10 Hidden Signs of Addiction) एक माता-पिता या जीवनसाथी (Spouse) होने के नाते, आप अपने अपनों को किसी और से बेहतर जानते हैं। कई बार आपके मन में एक अजीब सी घबराहट या अंतर्ज्ञान (Intuition) होता है कि घर में कुछ तो गलत हो रहा है। आपका बेटा, बेटी या जीवनसाथी अब पहले जैसा नहीं रहा। वे आपसे कटने लगे हैं, उनका स्वभाव बदल गया है, लेकिन आप पक्के तौर पर समझ नहीं पाते कि आखिर माजरा क्या है। अक्सर परिवार वालों को बहुत देर से पता चलता है कि उनका अपना किसी गंभीर ‘नशे’ (Addiction) की गिरफ्त में आ चुका है। नशा एक ऐसी बीमारी है जो बहुत खामोशी से घर में प्रवेश करती है। नशे का शिकार व्यक्ति अपनी इस लत को छिपाने में बहुत माहिर हो जाता है। यदि आप इंटरनेट पर ‘नशे के लक्षण’ (Nsha karne ke lakshan) या ‘How to know if someone is doing drugs’ खोज रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। इस ब्लॉग में हम आपको 10 ऐसे छिपे हुए संकेत (Signs of drug addiction) बताएंगे, जिनकी मदद से आप समय रहते इस बीमारी को पहचान सकते हैं और अपने प्रियजन की जान बचा सकते हैं। इन लक्षणों को हमने तीन मुख्य भागों में बांटा है: शारीरिक बदलाव, व्यवहार में बदलाव, और कमरे में मिलने वाली संदिग्ध चीजें। शारीरिक बदलाव (Physical Signs of Addiction) नशे का सबसे पहला और सीधा असर इंसान के शरीर पर पड़ता है। यदि आप ध्यान से देखें, तो ये शारीरिक बदलाव आसानी से पकड़े जा सकते हैं: 1. आंखों में लालिमा और अजीब लुक (Red or Glazed Eyes) गांजा, भांग, शराब या अन्य ड्रग्स लेने के बाद व्यक्ति की आंखें अक्सर लाल और सूजी हुई रहती हैं। कई बार उनकी आंखों की पुतलियां (Pupils) या तो सुई की नोक जितनी सिकुड़ जाती हैं या बहुत ज्यादा फैल जाती हैं। इस लालिमा को छिपाने के लिए वे बार-बार ‘आई-ड्रॉप्स’ (Eye-drops) का इस्तेमाल कर सकते हैं। 2. अचानक वजन गिरना या बढ़ना (Sudden Weight Loss or Gain) स्मैक, ब्राउन शुगर या कोकीन जैसे गंभीर नशों का सेवन करने वाले व्यक्ति की भूख अचानक मर जाती है। उनका वजन बहुत तेजी से गिरने लगता है, गाल अंदर धंस जाते हैं और चेहरा बीमारों जैसा पीला या काला पड़ने लगता है। वहीं, कुछ नशों (जैसे गांजा) में अचानक बहुत ज्यादा भूख (Munchies) लगने लगती है। 3. नींद के पैटर्न में भारी बदलाव (Changes in Sleep Patterns) अगर आपका प्रियजन रात-रात भर जागता रहता है और दिन में घंटों तक सोता है (नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना), तो यह एक बड़ा खतरे का संकेत है। नशा उनके दिमाग के ‘स्लीप साइकिल’ को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। 4. शारीरिक साफ-सफाई पर ध्यान न देना (Poor Hygiene) नशे की लत में डूबने के बाद इंसान को अपनी साफ-सफाई की परवाह नहीं रहती। रोज नहाना बंद कर देना, गंदे कपड़े पहने रहना, बालों पर ध्यान न देना, और शरीर या कपड़ों से अजीब सी दुर्गंध आना (जिसे छिपाने के लिए वे बहुत ज्यादा परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं) नशे के प्रमुख लक्षण हैं। व्यवहार में बदलाव (Behavioral Changes) नशा सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि इंसान की सोच और व्यवहार को भी बदल देता है। 5. खुद को कमरे में अकेले बंद रखना (Isolation) यह सबसे आम लक्षण है। जो बच्चा या व्यक्ति पहले परिवार के साथ बैठता था, बातें करता था, वह अचानक खुद को कमरे में बंद रखने लगता है। वे घंटों तक कुंडी लगाकर अंदर रहते हैं और किसी के कमरे में आने पर घबरा जाते हैं या गुस्सा करते हैं। 6. अचानक और बिना बात के गुस्सा आना (Extreme Mood Swings) नशे की तलब उठने पर या नशा न मिलने पर व्यक्ति बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है। छोटी-छोटी बातों पर भयंकर गुस्सा आना, चिल्लाना, या चीजें फेंकना आम बात हो जाती है। यदि आप उनसे उनके बदले हुए व्यवहार के बारे में सवाल पूछेंगे, तो वे तुरंत रक्षात्मक (Defensive) हो जाएंगे और आप पर ही हावी होने की कोशिश करेंगे। 7. पैसे चुराना या बार-बार पैसों की मांग करना (Financial Issues) नशा मुफ्त नहीं आता, और लत बढ़ने पर इसकी डोज़ भी बढ़ती है। पॉकेट मनी या सैलरी कम पड़ने लगती है। ऐसे में वे अक्सर अजीबोगरीब बहाने बनाकर पैसों की मांग करते हैं। जब उन्हें पैसे नहीं मिलते, तो घर से नकदी (Cash), जेवर, या कीमती सामान गायब होने लगता है। 8. पुराने दोस्तों को छोड़ना और नए दोस्त बनाना (Change in Peer Group) नशा करने वाला व्यक्ति अपने पुराने और अच्छे दोस्तों से कटने लगता है क्योंकि वे उसे टोक सकते हैं। वे ऐसे नए दोस्तों के साथ उठना-बैठना शुरू कर देते हैं, जिनका व्यवहार संदिग्ध होता है। वे आपको कभी अपने नए दोस्तों से नहीं मिलाएंगे और फोन पर छुपकर बातें करेंगे। कमरे में मिलने वाली संदिग्ध चीजें (Suspicious Paraphernalia) यदि आपको अपने प्रियजन पर शक है, तो उनके कमरे, बैग या कपड़ों की जेब में इन चीजों पर ध्यान दें: 9. अजीबोगरीब वस्तुएं मिलना (Drug Paraphernalia) कमरे में ऐसी चीजें मिलना जिनका कोई सामान्य उपयोग न हो, नशे का सबसे पक्का सबूत है: 10. गंध छिपाने वाली चीजों का अत्यधिक इस्तेमाल नशे की महक को छिपाने के लिए वे कमरे में बहुत ज्यादा रूम फ्रेशनर (Room Freshener), अगरबत्ती या परफ्यूम का इस्तेमाल करने लगते हैं। मुंह से शराब या सिगरेट की बदबू हटाने के लिए वे हर समय माउथवॉश, च्युइंग गम या इलायची चबाते हुए नजर आ सकते हैं। अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो क्या करें? अगर आपको ऊपर दिए गए 10 लक्षणों में से कई लक्षण अपने प्रियजन में दिखाई दे रहे हैं, तो घबराएं नहीं और न ही तुरंत उनसे लड़ना शुरू करें। अक्सर माता-पिता गुस्से में आकर मारपीट करते हैं या ताने मारते हैं, जिससे व्यक्ति और अधिक विद्रोही हो जाता है और घर से भागने या खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है। आपको यह समझना होगा कि आपका प्रियजन एक ‘बीमारी’ का शिकार है, और उसे सजा की नहीं, बल्कि सही ‘इलाज’ की जरूरत है। आज ही

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